Man ki laharen

Just another weblog

593 Posts

128 comments

अरुण


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by: Rss Feed

असहिष्णुता

Posted On: 28 Nov, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

सच्ची बातें और कुछ कविताएँ

Posted On: 8 May, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

कुछ सच्ची बातें

Posted On: 14 Apr, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

रुबाई

Posted On: 19 Mar, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

तीन रुबाईयां

Posted On: 18 Mar, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

६ रुबाईयां

Posted On: 14 Mar, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

आठ रुबाईयां

Posted On: 9 Mar, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

तीन रुबाईयां

Posted On: 27 Feb, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

रुबाई

Posted On: 24 Feb, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

तीन रुबाईयां

Posted On: 23 Feb, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

Page 1 of 6012345»102030...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: pkdubey pkdubey

के द्वारा: pkdubey pkdubey

के द्वारा: pkdubey pkdubey

के द्वारा: pkdubey pkdubey

के द्वारा: pkdubey pkdubey

के द्वारा: pkdubey pkdubey

के द्वारा: pkdubey pkdubey

के द्वारा: pkdubey pkdubey

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

कुछ सवाल जो अनुत्तरित हैं और रहेंगे भी??? जब युद्ध समाप्त हुआ था, पाण्डव ने राज्य को पाया। जाऊँ मैं द्वारका वापिस, श्रीकृष्ण के मन में आया।। बोले थे वह अर्जुन से, मुझको अब वापस जाना। अर्जुन श्रीकृष्ण से बोले, फिर से वह ज्ञान सुनाना।। जो युद्ध भूमि में तुमने, था मुझको मित्र सुनाया। चंचल बुद्धि है मेरी, मैंने वह सब बिसराया।। श्रीकृ्ष्ण ने भी बोला था, वह याद नहीं अब मुझको। अब नहीं योग की स्थिति, कैसे बतलाऊँ तुझको।। हाथी चिंघाड़ रहे थे, था कोलाहल भी भारी। अर्जुन कैसे सुन पाये, श्रीकृष्ण की बातें सारी?? अर्जुन श्रीकृष्ण से बोले, जरा क्षेत्र बीच में चलिये। अपने हैं उनको देखूं, रथ क्षेत्र बीच में करिये।। अरबों तो लोग जमा थे, अपनों को क्या पहचाना? पहचानो हो अर्जुन ने, ऐसा मुश्किल हो पाना।। क्या अर्जुन कृष्ण कवि थे, श्लोक में लिक्खी गीता? जो युद्ध हुआ महाभारत, क्या नैतिकता से जीता??

के द्वारा: dineshaastik dineshaastik

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: Pradeep Kesarwani Pradeep Kesarwani

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: arunsathi arunsathi

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: shalinikaushik shalinikaushik

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: अरुण अरुण

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: jlsingh jlsingh




latest from jagran